मौसम विभाग की भविष्यवाणी की माने तो #दक्षिणी-पश्चिमी #मानसून एक जून
को केरल में दस्तक दे सकता है. विभाग का मानना है कि अनुमानतः मानसून चार दिन आगे या पीछे भी
पहुंच सकता है. आमतौर पर देखें तो मानसून केरल में पहली जून तक
दस्तक दे देता है. ऐसे में यदि इस साल मानसून सामान्य रहता
है तो यह किसानों की अर्थव्यवस्था के लिहाज से अच्छी खबर होगी. हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान
के मुताबिक जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण पश्चिम मानसून में बारिश दीर्घकालिक
औसत के 93 फीसदी रहने की संभावना है. इसके बावजूद अभी #अल-नीनो का
खतरा टला नहीं है. #वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल ऑर्गनाइजेशन दक्षिण
एशिया के ज्यादातर हिस्सों में अल-नीनो के चलते सामान्य से कम बारिश होने की आशंका
जता चुका है.
गौरतलब है कि दक्षिणी-पश्चिमी मानसून #खेती,
किसानी के लिए
बेहद महत्वपूर्ण है. #खरीफ फसलें मसलन #चावल, #सोयाबीन, #कपास और मक्के की खेती मानसूनी बारिश पर बहुत हद तक निर्भर रहती हैं. देश की 60 प्रतिशत खेती मानसूनी वर्षा पर आधारित है.
22 अप्रैल को आईएमडी द्वारा
जारी पहले पूर्वानुमान के मुताबिक जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण पश्चिम
मानसून में सामान्य मानसून की संभाव्यता 28 फीसदी है. मौसम विभाग लंबी अवधि के औसत के
आधार 96 फीसदी से 104 फीसदी के दायरे को
सामान्य, 105 से 110 फीसदी एलपीए को सामान्य
से ज्यादा और 110 फीसदी को अत्यधिक बारिश मानता है. चार महीने के
मानसून सीजन (जून-सितंबर) में पूरे साल के दौरान होने वाली बारिश में इसकी तीन
चौथाई हिस्सेदारी होती है.
अंतरराष्ट्रीय एंजेसियों ने जताया अल नीनो का खतरा
वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्सों
में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. इसके मुताबिक मध्य और पश्चिमोत्तर
भारत के अधिकांश भागों में 25-40 फीसदी कम बारिश होने की
आशंका है.
अमेरिका के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (सीपीसी) और ऑस्ट्रेलिया के मौसम
विज्ञान ब्यूरो ने इस गर्मी में अल नीनो की भविष्यवाणी की है. सीपीसी ने इस साल 50-60 फीसदी अल नीनो प्रभाव की आशंका जताई है. एजेंसी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि
प्रशांत महासागर में कमजोर अल नीनो की स्थिति पनप रही है. वहीं ऑस्ट्रेलियाई
एजेंसी ने 70 फीसदी अल नीनो की संभावना जताई है.
स्काई-मेट सर्विसेज के मुताबिक इस साल देश में सामान्य मानसून की संभावना है.
स्काई-मेट ने 102 फीसदी बारिश का अनुमान लगाया है. स्काई-मेट के
आंकड़ों के मुताबिक जब भी अलनीनो का असर हुआ है तो 90 फीसदी मामलों में मानसून
के दौरान बारिश सामान्य से कम हुई है. 2002, 2004,
2009 और 2014 में अलनीनो के कारण देश में सूखा जैसे हालात पैदा हुए थे.


No comments:
Post a Comment