किसान भाइयों ने जायद की फसले लगा दी है और उसके बचाव हेतु चिंतित हैं. आज हम आपको भिन्डी और टमाटर में लगने वाले कीटों से आपके खेतों को निज़ात देने के जरीके से परिचय कराएँगे. भिण्डी और टमाटर प्रमुख सब्जी एवं नकदी फसल है जिसका मांग हमेशा बनी रहती है. खरीफ फसल की तुलना में जायद फसल में कीट और रोग कम लगते हैं फिर भी कुछ कीट और रोग की सक्रियता से हानि होती है जिससे निम्न बताए गए विधियों का प्रयोग कर निज़ात पाया जा सकता
माहो तथा जेसिड सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं. क्षति सीमा के पहले ही मैलाथियान 50 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर दो छिड़काव 15 दिनों से अंतर से करें.
फुदका, तना छेदक की रोकथाम हेतु डायमिथिएट 30 ई.सी. या मेटासिस्टाक्स 20 ई.सी. 1 से 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
टमाटर में झुलसा रोग पत्तियों पर आता है. रोकथाम हेतु डाईथेन एम 45 की 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
भिण्डी में भभूतिया रोग बहुतायत से आता है तथा हानि पहुंचाता है. उपचार हेतु 2 ग्राम सल्फेक्स प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतर से दो छिड़काव करें.
भिण्डी की फसल पर सफेद मक्खी की सक्रियता पर पैनीनजर रखना जरूरी है क्योंकि इसके द्वारा पीला मोजेक बीमारी का विस्तार होता है. बचाव हेतु मेटासिस्टाक्स 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव 15 दिनों के अंतर से किये जाये.
माहो तथा जेसिड सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं. क्षति सीमा के पहले ही मैलाथियान 50 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर दो छिड़काव 15 दिनों से अंतर से करें.
फुदका, तना छेदक की रोकथाम हेतु डायमिथिएट 30 ई.सी. या मेटासिस्टाक्स 20 ई.सी. 1 से 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
टमाटर में झुलसा रोग पत्तियों पर आता है. रोकथाम हेतु डाईथेन एम 45 की 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
भिण्डी में भभूतिया रोग बहुतायत से आता है तथा हानि पहुंचाता है. उपचार हेतु 2 ग्राम सल्फेक्स प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतर से दो छिड़काव करें.
भिण्डी की फसल पर सफेद मक्खी की सक्रियता पर पैनीनजर रखना जरूरी है क्योंकि इसके द्वारा पीला मोजेक बीमारी का विस्तार होता है. बचाव हेतु मेटासिस्टाक्स 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव 15 दिनों के अंतर से किये जाये.
